अरिल्ल छंद / डिल्ला छंद

सावन की शोभा है अनुपम।
रिमझिम की छायी है छमछम।।
नभ में काले बादल छायें।
तृषित धरा की प्यास बुझायें।।

मोर पपीहा शोर मचायें।
वर्षा की ये आस जगायें।।
कूक रही बागों में कोयल।
रसिक हृदय में करती हलचल।।

बाग बगीचों में हरियाली।
खिली हुई तरु की हर डाली।।
झूलों का हर ओर धमाका।
घर घर में है धूम धड़ाका।।

सावन की नित नवल तरंगें।
मन में भरतीं मृदुल उमंगें ।।
छटा प्रकृति की है यह न्यारी।
‘नमन’ हृदय इस पर बलिहारी।।
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अरिल्ल छंद विधान –

अरिल्ल छंद 16 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। यह संस्कारी जाति का छंद है। एक छंद में कुल 4 चरण होते हैं और छंद के दो दो या चारों चरण सम तुकांत होने चाहिए। यह छंद भी पादाकुलक परिवार का ही एक छंद है। प्रति चरण चार चौकल के अतिरिक्त अरिल्ल छंद में चरणांत की बाध्यता है। यह चरणांत दो लघु (11) या यगण (1SS) का हो सकता है। इस प्रकार अरिल्ल छंद की मात्रा बाँट:- 4*3 211 या 4*2 3 1SS सिद्ध होती है। 3 1SS को 211 SS भी कर सकते हैं।

भानु कवि के छंद प्रभाकर में पादाकुलक छंद के प्रकरण में इससे मिलते जुलते कई छंदों की सोदाहरण व्याख्या की गयी है। यहाँ मैं अरिल्ल छंद से मिलता जुलता एक और छंद उदाहरण सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ। ।

डिल्ला छंद विधान – डिल्ला छंद संस्कारी जाति का 16 मात्रिक छंद है। इसमें चार चौकल के अतिरिक्त चरणांत भगण (S11) से होना चाहिए।
अरिल्ल छंद में भी चरणांत में दो लघु मान्य हैं परंतु भगण की बाध्यता नहीं है। इस प्रकार डिल्ला छंद का हर चरण अरिल्ल छंद में भी मान्य रहता है परंतु अरिल्ल छंद के चरण का डिल्ला छंद का चरण होना आवश्यक नहीं। डिल्ला छंद की मात्रा बाँट:- 4*3 S11 है।

रिमझिम करता आया सावन।
रसिक जनों का मन हरषावन।।
उमड़ घुमड़ के छाये बादल।
विरहणियों को करते घायल।।

धरणी से फूटे नव अंकुर।
बोल रहें दादुर हों आतुर।।
महिना सावन का है पावन।
सबका प्यारा ये मनभावन।।

मात्रिक छंद परिभाषा
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

6 Responses

  1. मनोहारी सावन की अनुपम छटा का अत्यंत सुंदर चित्र उकेरा हूं भैया आपने।
    अरिल्ल तथा डिंगा छंद के बारे में विस्तृत जानकारी आपने उदाहरण सहित बहुत ही सुंदर से समझाई है।

      1. श्रीमान आपका कार्य सराहनीय है यदि आपका कोई YouTube चैनल है तो कृप्या कर बताये हम जैसे हिंदी के नए विधार्थियो की बोहत मदद होगी |

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