कामदा छंद

“देश की हालत”

स्वार्थ में सनी राजनीति है।
वोट नोट से आज प्रीति है।
देश खा रहे हैं सभी यहाँ।
दौर लूट का देखिये जहाँ।।

त्रस्त आज आतंक से सभी।
देश की न थी ये दशा कभी।
देखिये जहाँ रक्त-धार है।
लोकतंत्र भी शर्मसार है।।

शील नारियाँ हैं लुटा रही।
लाज से मरी जा रही मही।
अर्थ पाँव पे जो टिकी हुई।
न्याय की व्यवस्था बिकी हुई।।

धूर्त चोर नेता यहाँ हुये।
कीमतें सभी आसमाँ छुये।।
देश की दशा है बड़ी बुरी।
वृत्ति छा गयी आज आसुरी।।
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कामदा छंद विधान – (वर्णिक छंद परिभाषा) <– लिंक

“रायजाग” ये वर्ण राखते।
छंद ‘कामदा’ धीर चाखते।।

“रायजाग” = रगण यगण जगण गुरु
(212 122 121 2)
10 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद, 4 चरण दो दो सम तुकान्त।

(पंक्तिका छंद के नाम से भी यह छंद प्रसिद्ध है।)
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

4 Responses

  1. देश की वर्तमान अवस्था का बहुत सुंदर खाका खींचा है।

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