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Category: छंद

ताटंक छंद ‘स्वच्छ भारत’

ताटंक छंद
सुंदर स्वच्छ बनेगा भारत, ऐसा शुभ दिन आएगा।
तन मन धन से भारतवासी ,जब आगे बढ़ जाएगा।।
अलग-अलग आलाप छोड़कर, मिलकर सुर में गाएगा ।

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ताटंक छंद “नारी की पीड़ा”

ताटंक छंद सम-पद मात्रिक छंद है। इस चार पदों के छंद में प्रति पद 30 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पद 16 और 14 मात्रा के दो चरणों में बंटा हुआ रहता है। इस छंद में अंतिम तीन मात्राएँ सदैव गुरु = 2 होती हैं।

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कुकुभ छंद, ‘मेरा मन’

कुकुभ छंद गीत

जब-जब आह्लादित होता मन, गीत प्रणय के गाती हूँ,
खुशियाँ लेकर आये जो क्षण, फिर उनको जी जाती हूँ।

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चंचरीक छंद “बाल कृष्ण”

चंचरीक छंद या हरिप्रिया छंद चार प्रति पद 46 मात्राओं का सम मात्रिक दण्डक है। इसका यति विभाजन (12+12+12+10) = 46 मात्रा है। मात्रा बाँट – 12 मात्रिक यति में 2 छक्कल का तथा अंतिम यति में छक्कल+गुरु गुरु है।

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लावणी छंद ” बेटियाँ”

लावणी छंद गीत

“बेटियाँ”

घर की रौनक होती बेटी, सर्व गुणों की खान यही।
बेटी होती जान पिता की, है माँ का अभिमान यही।।

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प्रमिताक्षरा छंद “मिलन”

प्रमिताक्षरा छंद विधान –

“सजसासु” वर्ण सज द्वादश ये।
‘प्रमिताक्षरा’ मधुर छंदस दे।।

“सजसासु” = सगण जगण सगण सगण।
112 121 112 112 = 12 वर्ण का वर्णिक छंद।

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ग्रंथि छंद “देश का ऊँचा सदा”

ग्रंथि छंद चार पदों का एक सम मात्रिक छंद है जिसमें प्रति पद 19 मात्राएँ होती हैं तथा प्रत्येक पद 12 और 7 मात्रा की यति में विभक्त रहता है।

2122 212,2 212

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हास्य कुण्डलिया

“हास्य कुण्डलिया”

बहना तुमसे ही कहूँ, अपने हिय की बात,
जीजा तेरा कवि बना, बोले सारी रात।
बोले सारी रात, नींद में कविता गाये,
भृकुटी अपनी तान, वीर रस गान सुनाये।
प्रकट करे आभार, गजब ढाता यह कहना,
धरकर मेरा हाथ, कहे आभारी बहना।

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चौपई छंद “चूहा बिल्ली”

चौपई छंद जो जयकरी छंद के नाम से भी जाना जाता है,15 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। इन 15 मात्राओं की मात्रा बाँट:- 12 + S1 है। 12 मात्रिक अठकल चौकल, चौकल अठकल या तीन चौकल हो सकता है।

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कुण्डलिया छंद, ‘गंगा मैया’

कुण्डलिया छंद, ‘गंगा मैया’

गंगा मैया आपकी,शरण पड़े नर नार।
पावन मन निर्मल करो, काटो द्वेष विकार।।

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पवन छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

पवन छंद “श्याम शरण”

पवन छंद विधान –

“भातनसा” से, ‘पवन’ सजति है।
पाँच व सप्ता, वरणन यति है।।

“भातनसा” = भगण तगण नगण सगण।
211   22,1  111  112

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कुंडल छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

कुंडल छंद “ताँडव नृत्य”

कुंडल छंद 22 मात्रा का सम मात्रिक छंद है जिसमें 12,10 मात्रा पर यति रहती है। अंत में दो गुरु आवश्यक; यति से पहले त्रिकल आवश्यक। मात्रा बाँट :- 6+3+3, 6+SS

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कुण्डलिया छंद “मोबायल”

कुण्डलिया छंद

मोबायल से मिट गये, बड़ों बड़ों के खेल।
नौकर, सेठ, मुनीमजी, इसके आगे फेल।
इसके आगे फेल, काम झट से निपटाता।
मुख को लखते लोग, मार बाजी ये जाता।
निकट समस्या देख, करो नम्बर को डॉयल।
सौ झंझट इक साथ, दूर करता मोबायल।।

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डमरू घनाक्षरी “नटवर”

डमरू घनाक्षरी 32 वर्ण प्रति पद की घनाक्षरी है। इस घनाक्षरी की खास बात जो है वह यह है कि ये 32 के 32 वर्ण लघु तथा मात्रा रहित होने चाहिए।

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चंडिका छंद “आँखें”

चंडिका छंद जो कि धरणी छंद के नाम से भी जाना जाता है, 13 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत रगण (S1S) से होना आवश्यक है। इसमें प्रथम 8 मात्रा पर यति अनिवार्य है।

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पद्ममाला छंद “माँ के आँसू”

पद्ममाला छंद विधान –

“रारगागा” रखो वर्णा।
‘पद्ममाला’ रचो छंदा।।

“रारगागा” = रगण रगण गुरु गुरु।
(212  212  2 2)

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हरिगीतिका छंद “माँ और उसका लाल”

हरिगीतिका छंद चार पदों का एक सम-पद मात्रिक छंद है। प्रति पद 28 मात्राएँ होती हैं तथा यति 16 और 12 मात्राओं पर होती है। मात्रा बाँट-
2212 2212 2212 221S

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पंचचामर छंद
शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'

पंचचामर छंद ” हनुमान स्तुति”

पंचचामर छंद “हनुमान स्तुति”

उपासना करें सभी, महाबली कपीश की,
विराट दिव्य रूप की, दयानिधान ईश की।

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मनहरण घनाक्षरी “कतार”

मनहरण घनाक्षरी छंद

जनसंख्या भीड़ दिन्ही, भीड़ धक्का-मुक्की किन्ही,
धक्का-मुक्की से ही बनी, व्यवस्था कतार की।

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पंचचामर छंद “देहाभिमान”

पंचचामर छंद जो कि नाराच छंद के नाम से भी जाना जाता है, १६ वर्ण प्रति पद का वर्णिक छंद है।

लघु गुरु x 8 = 16 वर्ण, यति 8+8 वर्ण पर।

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