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Category: सरसी छंद

सरसी छंद ‘हे नाथ’

“सरसी छंद”

करो कृपा हे नाथ विनय मैं, करती बारम्बार।
श्रद्धा तुझमें बढ़ती जाये, तुम जीवन सुखसार।।

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सरसी छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

सरसी छंद “राजनाथजी”

सरसी छंद चार पदों का सम-पद मात्रिक छंद है। जिस में प्रति पद 27 मात्रा होती है। यति 16 और 11 मात्रा पर है।

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