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Category: वर्णिक छंद

नील छंद “विरहणी”

नील छंद विधान –

“भा” गण पांच रखें इक साथ व “गा” तब दें।
‘नील’ सुछंदजु षोडस आखर की रच लें।।

“भा” गण पांच रखें इक साथ व “गा”= 5 भगण+गुरु

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धार छंद “आज की दशा”

धार छंद विधान
“माला” वार।
पाओ ‘धार’।।

“माला” = मगण लघु
222 1 = 4 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद।

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दोधक छंद “आत्म मंथन”

दोधक छंद / मधु छंद विधान –
“भाभभगाग” इकादश वर्णा।
देवत ‘दोधक’ छंद सुपर्णा।।
“भाभभगाग” = भगण भगण भगण गुरु गुरु
211 211 211 22 = 11 वर्ण की वर्णिक छंद।

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तोटक छंद “विरह”

तोटक छंद विधान –
जब द्वादश वर्ण “ससासस” हो।
तब ‘तोटक’ पावन छंदस हो।।

“ससासस” = चार सगण
112 112 112 112 = 12 वर्ण

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मंदाक्रान्ता छंद “जागो-जागो”

वाणी बोलो,सुनकर जिसे,काल भी जाग जाए।
आगे आओ,सुरभि जग के,नाम बाँटो सुहाए।।
आभा फैले,धरणि तल में,गान पंछी सुनाएँ।
प्रातः जागे,सब जन जगें,सौख्य का सार पाएँ।।

मंदाक्रान्ता छंद

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मंदाक्रान्ता छंद “साध्य की खींच रेखें”

मंदाक्रान्ता छंद
गाना होता,मगन मन से,राम का नाम प्यारे।
आओ गाएँ,हम-तुम सभी,त्याग दें काम सारे।।
मिथ्या जानो,जगत भर के,रूप-लावण्य पाए।
वेदों के ये,वचन पढ़ के,काव्य के छंद गाए।।

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सुमति छंद “भारत देश”

सुमति छंद विधान –
गण “नरानया” जब सज जाते।
‘सुमति’ छंद की लय बिखराते।।

“नरानया” = नगण रगण नगण यगण =111 212 111 122

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चन्द्रिका छंद “वचन सार”

चन्द्रिका छंद विधान –
“ननततु अरु गा”, ‘चन्द्रिका’ राचते।
यति सत अरु छै, छंद को साजते।।
111 111 2,21 221  2 = 13 वर्ण, 7, 6 यति।

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चंचला छंद “बसंत वर्णन”

चंचला छंद विधान –
“राजराजराल” वर्ण षोडसी रखो सजाय।
‘चंचला’ सुछंद राच आप लें हमें लुभाय।।

21×8 = 16 वर्ण प्रत्येक चरण।

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घनश्याम छंद “दाम्पत्य सुख”

घनश्याम छंद विधान –
“जजाभभभाग”, में यति छै, दश वर्ण रखो।
रचो ‘घनश्याम’, छंद अतीव ललाम चखो।।

“जजाभभभाग” = जगण जगण भगण भगण भगण गुरु।

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रथोद्धता छंद “आह्वाहन”

रथोद्धता छंद विधान –
“रानरा लघु गुरौ” ‘रथोद्धता’।
तीन वा चतुस तोड़ के सजा।

“रानरा लघु गुरौ” = 212 111 212 12

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गजपति छंद “नव उड़ान”

गजपति छंद विधान –

“नभलगा” गण रखो।
‘गजपतिम्’ रस चखो।।

“नभलगा” नगण  भगण लघु गुरु
( 111   211  1 2)

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शालिनी छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

शालिनी छंद “राम स्तवन”

शालिनी छंद विधान –
राचें बैठा, सूत्र “मातातगागा”।
गावें प्यारी, ‘शालिनी’ छंद रागा।।

“मातातगागा”= मगण, तगण, तगण, गुरु, गुरु
(222 221 221 22)

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हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम”

हरिणी छंद विधान –

मधुर ‘हरिणी’, राचें बैठा, “नसामरसालगे”।
प्रथम यति है, छै वर्णों पे, चतुष् फिर सप्त पे।

“नसामरसालगे” = नगण, सगण, मगण, रगण, सगण, लघु और गुरु।
111 112, 222 2,12 112 12

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कामदा छंद “देश की हालत”

कामदा छंद विधान –

“रायजाग” ये वर्ण राखते।
छंद ‘कामदा’ धीर चाखते।।

“रायजाग” = रगण यगण जगण गुरु (212 122 121 2)

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कलाधर छंद “योग साधना”

कलाधर छंद विधान –

पाँच बार “राज” पे “गुरो” ‘कलाधरं’ सुछंद।
षोडशं व पक्ष पे विराम आप राखिए।।
ये घनाक्षरी समान छंद है प्रवाहमान।
राचिये इसे सभी पियूष-धार चाखिये।।

पाँच बार “राज” पे “गुरो” = (रगण+जगण)*5 + गुरु। (212  121)*5+2
यानी गुरु लघु की 15 आवृत्ति के बाद गुरु यानी
21×15 + 2 तथा 16 और पक्ष=15 पर यति।

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कनक मंजरी छंद “गोपी विरह”

कनक मंजरी छंद विधान:-

प्रथम रखें लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ रख लें।
सु’कनक मंजरि’ छंद रचें यति तेरह वर्ण तथा दश पे।।

लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ = 4लघु+6भगण(211)+1गुरु]=23 वर्ण

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