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Category: छंद

बादल दादा-दादी जैसे, कुकुभ छंद

बादल दादा दादी जैसे,

‘कुकुभ छंद’

श्वेत, सुनहरे, काले बादल, आसमान पर उड़ते हैं।
धवल केश दादा-दादी से, मुझे दिखाई पड़ते हैं।।

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छप्पय छंद “शिव-महिमा”

छप्पय छंद एक विषम-पद मात्रिक छंद है। यह भी कुण्डलिया छंद की तरह छह पदों का एक मिश्रित छंद है जो दो छंदों के संयोग से बनता है। इसके प्रथम चार पद रोला छंद के हैं, जिसके प्रत्येक पद में 24-24 मात्राएँ होती हैं तथा यति 11-13 पर होती है। आखिर के दो पद उल्लाला छंद के होते हैं।

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गीतिका छंद “चातक पक्षी”

गीतिका छंद चार पदों का एक सम-मात्रिक छंद है। प्रति पद 26 मात्राएँ होती है तथा प्रत्येक पद 14-12 अथवा 12-14 मात्राओं की यति के अनुसार होता है। निम्न वर्ण विन्यास पर गीतिका छंद सर्वाधिक मधुर होता है, जो रचनाकारों में एक प्रकार से रूढ है।

2122 2122 2122 212

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सोरठा छंद  ‘सोरठा विधान’

सोरठा छंद ‘सोरठा विधान’ लिखें सोरठा आप, दोहे को उल्टा रचें। अनुपम छोड़े छाप, लिखे सोरठा जो मनुज।। अठकल पाछे ताल, विषम चरण में राखिये। विषम अंत की चाल, तुकबंदी से ही खिले।। अठकल सरल

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रति छंद “प्यासा मन-भ्रमर”

रति छंद विधान –

‘रति’ छंदा’, रख गण “सभनसागे”।
यति चारा, अरु नव वरण साजे।।

“सभनसागे” = सगण भगण नगण सगण गुरु

( 112  2,11  111  112  2) = 13 वर्ण का वर्णिक छंद, यति 4-9 वर्णों पर।

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किरीट सवैया “काव्य-मंच”

किरीट सवैया “काव्य-मंच” मंच बढ़े कविता सिमटी अब, फूहड़ हास्य परोस रहे कवि। लुप्त हुए शुचि छंद सनातन, धूमिल होय रही कविता छवि।। मान मिले अरु नाम बढ़े बस, देय रहे कवि काव्यमयी हवि। अंधन

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सरस छंद “ममतामयी माँ”

सरस छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत नगण (111) से होना आवश्यक है। इसमें 7 – 7 मात्राओं पर यति अनिवार्य है।

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दोहा छंद  ‘एक जनवरी’

दोहा छंद ‘एक जनवरी’ अभिनंदन उल्लास का, करता भारतवर्ष। नये साल का आगमन, रोम रोम में हर्ष।। हैप्पी हैप्पी न्यू इयर, हैप्पी हैं सब लोग। एक जनवरी को लगे, घर घर मदिरा भोग।। टिक टिक

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ताटंक छंद ‘भँवर’

ताटंक छंद (गीत) ‘भँवर’ बीच भँवर में अटकी नैया, मंजिल छू ना पाई है। राहों में अपने दलदल की, खोदी मैंने खाई है।। कच्ची माटी के ढेले सा, मन कोमल सा मेरा था। जिधर मिला

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दोहा छंद ‘असम प्रदेश’

दोहा छंद ‘असम प्रदेश’ माँ कामाख्या धाम है, ब्रह्मपुत्र नद धार। पत्ता पत्ता रसभरा, सुखद असम का सार।। धरती शंकरदेव की, लाचित का अभिमान। कनकलता की वीरता, असम प्रांत की शान।। बाँस, चाय, रेशम घना,

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विजया घनाक्षरी “कामिनी”

विजया घनाक्षरी विधान:-

(8, 8, 8, 8 पर यति अनिवार्य।
प्रत्येक यति के अंत में हमेशा लघु गुरु (1 2) अथवा 3 लघु (1 1 1) आवश्यक।
आंतरिक तुकान्तता के दो रूप प्रचलित हैं। प्रथम हर चरण की तीनों आंतरिक यति समतुकांत। दूसरा समस्त 16 की 16 यति समतुकांत।

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शार्दूलविक्रीडित छंद ‘माँ लक्ष्मी वंदना’

शार्दूलविक्रीडित छंद ‘माँ लक्ष्मी वंदना’ सारी सृष्टि सदा सुवासित करे, देती तुम्ही भव्यता। लक्ष्मी हे कमलासना जगत में, तेरी बड़ी दिव्यता।। पाते वो धन सम्पदा सहज ही, ध्यावे तुम्हे जो सदा। आकांक्षा मन की सभी

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विजात छंद “उदंडी”

विजात छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। यह एक मापनी आधारित छंद है। इन 14 मात्राओं की मात्रा बाँट:- 1222 1222 है।

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मणिमध्या छंद ‘नैतिक शिक्षा’

मणिमध्या छंद विधान-

मणिमध्या मापनीयुक्त वर्णिक छंद है। इसमें 9 वर्ण होते हैं।
इसका मात्राविन्यास निम्न है-

211 222 112

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मनोज्ञा छंद “होली”

मनोज्ञा छंद विधान –

“नरगु” वर्ण सप्ता।
रचत है ‘मनोज्ञा’।।

“नरगु” = नगण रगण गुरु
111 212 + गुरु = 7 वर्ण का वर्णिक छंद।

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दोहा छंद  ‘जय पितरजी’

             दोहा छंद   ‘जय पितरजी’ पितरों के सम्मान में, नमन नित्य सौ बार। भाव सुमन अर्पण करूँ, आप करो स्वीकार।। श्राद्ध पक्ष का आगमन, पितरों का सत्कार। श्रद्धा से

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लावणी छंद ‘एक चिट्ठी माँ के नाम’

लावणी छंद ‘एक चिट्ठी माँ के नाम’ लिखने बैठी माँ को चिट्ठी, हाल सभी बतलाती है। नन्हे मन की अति व्याकुलता, खोल हृदय दिखलाती है।। लिखती वो सब ठीक चल रहा, बदला कुछ यूँ खास

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मनोरम छंद “वीर सैनिक”

मनोरम छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। यह मानव जाति का छंद है। इन 14 मात्राओं की मात्रा बाँट:-
S122 21SS या S122 21S11 है।

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