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Category: छंद

लावणी छंद  ‘दिल मेरा ही छला गया’

लावणी छंद (गीत) ‘दिल मेरा ही छला गया’ क्यूँ शब्दों के जादूगर से, दिल मेरा ही छला गया। उमड़ घुमड़ बरसाया पानी, बादल था वो चला गया।। तड़प रही थी एक बूंद को, सागर चलकर

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शृंगार छंद “सुख और दुख”

शृंगार छंद बहुत ही मधुर लय का 16 मात्रा का चार चरण का छंद है। तुक दो दो चरण में है। इसकी मात्रा बाँट 3 – 2 – 8 – 3 (ताल) है।

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विष्णुपद छंद  ‘मंजिल पायेंगे’

विष्णुपद छंद ‘मंजिल पायेंगे’ आगे हरदम बढ़ने का हम, लक्ष्य बनायेंगे। चाहे रोड़े हों राहों में, मंजिल पायेंगे।। नवल सपन आँखों में लेकर, हम सोपान चढ़ें। कायरता की तोड़ हथकड़ी, हम निर्भीक बढ़ें।। जोश भरे

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मनविश्राम छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

मनविश्राम छंद “माखन लीला”

मनविश्राम छंद विधान –

“भाभभुभाभनुया” यति दें, दश रुद्र वरण अभिरामा।
छंद रचें कवि वृन्द सभी, मनभावन ‘मनविशरामा’।।

“भाभभुभाभनुया” = भगण की 5 आवृत्ति फिर नगण यगण।

211 211 211 2,11 211 111 122 = कुल 21 वर्ण का वर्णिक छंद, यति 10 और 11 वर्ण।

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सरसी छंद ‘मुन्ना मेरा सोय’

सरसी छंद ‘मुन्ना मेरा सोय’ ओ मेघा चुप हो जा मेघा, मुन्ना मेरा सोय। खिल-खिल हँसता कभी मुलकता, मधुर स्वप्न में खोय।। घड़-घड़ भड़-भड़ जोर-जोर से, शोर मचाना छोड़। आँख लगी मुन्ने की अब तो,

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मनमोहन छंद “राजनीति”

मनमोहन छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत नगण (111) से होना आवश्यक है। इसमें 8 और 6 मात्राओं पर यति अनिवार्य है।

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चौपाई छंद ‘माँ की वेदना’

चौपाई छंद ‘माँ की वेदना’ बेटी ने खुशियाँ बरसाई। जिस दिन वो दुनिया में आई।। उसके आने से मन महका। कोना-कोना घर का चहका।। जीवन में फैला उजियारा। समय बीतता उस पर सारा।। झूला बाहों

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मधुमती छंद “मधुवन महके”

मधुमती छंद विधान –

“ननग” गणन की।
मधुर ‘मधुमती’।।

“ननग” = (नगण नगण गुरु)
111 111 2 = 7 वर्ण का वर्णिक छंद।

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मोहन छंद ‘होली प्रेम’

मोहन छंद ‘होली प्रेम’ केशरी, घटा घनी, वृक्ष सकल, झूम रहे। मोहनी, बयार को, मोर सभी, चूम रहे।। दृश्य यह, प्रेमभरा, राधा को, तंग करे। श्याम कब, आओगे, हाथों में, चंग धरे।। रंग से, अंग

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मधुमालती छंद “पर्यावरण”

मधुमालती छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। इसमें 7 – 7 मात्राओं पर यति तथा पदांत रगण (S1S) से होना अनिवार्य है। इन 14 मात्राओं की मात्रा बाँट:- 2212, 2S1S है।

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आल्हा छंद  ‘सैनिक’

आल्हा छंद ‘सैनिक’ मैं सैनिक निज कर्तव्यों से, कैसे सकता हूँ मुँह मोड़। प्रबल भुजाओं की ताकत से, रिपु दल का दूँगा मुँह तोड़।। मातृभूमि की रक्षा करने, खड़ा रहूँ बन्दूकें तान। कहता है फौलादी

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मत्तगयंद सवैया “हरि गुण”

मत्तगयंद सवैया छंद 23 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। यह सवैया भगण (211) पर आश्रित है, जिसकी 7 आवृत्ति और अंत में दो गुरु वर्ण प्रति चरण में रहते हैं। इसकी संरचना 211× 7 + 22 है।

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भव छंद “जागो भारत”

भव छंद विधान –

भव छंद 11 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत गुरु वर्ण (S) से होना आवश्यक है । चरणांत के आधार पर इन 11 मात्राओं के दो विन्यास हैं। प्रथम 8 1 2(S) और दूसरा 6 1 22(SS)।

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भानु छंद ‘श्याम प्रार्थना’

भानु छंद ‘श्याम प्रार्थना” मुरलीधर, तू ही जग का पालनहार। ब्रजवासी, तुझमें बसता यह संसार।। यदुकुल में, लिया कृष्ण बनकर अवतार। अविनाशी, इस जग का तू ही हो सार।। यशुमति माँ, नंद पिता भ्राता बलराम।

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भृंग छंद “विरह विकल कामिनी”

भृंग छंद विधान –

“ननुननुननु गल” पर यति, दश द्वय अरु अष्ट।
रचत मधुर यह रसमय, सब कवि जन ‘भृंग’।।

“ननुननुननु गल” = नगण की 6 आवृत्ति फिर गुरु लघु। 20 वर्ण का वर्णिक छंद, यति 12, 8 वर्ण पर।

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संत छंद ‘संकल्प’

संत छंद ‘संकल्प’ हुई भोर नयी, आओ स्वागत करलें। चलो साथ बढ़ें, नव ऊर्जा हिय भरलें।। खिली धूप धवल, कहाँ तिमिर अब गहरा। रुचिर पुष्प खिले, बाग रहा है लहरा।। करें कार्य वही, जिससे निज

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पद्धरि छंद “जीवन मंत्र”

पद्धरि छंद 16 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। इन 16 मात्राओं की मात्रा बाँट:- द्विकल + अठकल + द्विकल + 1S1 (जगण) है।

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उपमान छंद  ‘शिवा’

उपमान छंद   ‘शिवा’ हे सोमेश्वर हे शिवा, भोले भंडारी। शीश चन्द्रमा सोहता, जटा गंगधारी।। अंग भुजंग विराजते, गल मुंडन माला। कर त्रिशूल डमरू धरे, तन पर मृग छाला।। भष्म रमाये देह पर, अंग-अंग सोहे।

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भूमिसुता छंद “जीव हिंसा”

भूमिसुता छंद विधान –

“मामामासा” तोड़ो आठा, चार सजा।
सारे भाई चाखो छंदा, ‘भूमिसुता’।।

“मामामासा” = मगण मगण मगण सगण
222 222 22//2 112 = 12वर्ण का वर्णिक छंद।

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चांद्रायण छंद ‘सुमिरन’

चांद्रायण छंद  ‘सुमिरन’ हरि के नाम अनेक, जपा नित कीजिये। आठों याम सचेत, सुधा रस पीजिये।। महिमा बड़ी विराट, नित स्मरण में रखें। मन से नाम पुकार, कृपा प्रभु की लखें।। पढ़लें ग्रन्थ अनेक, सुधिजन

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