Categories
Archives

Category: छंद

कामदा छंद “देश की हालत”

कामदा छंद / पंक्तिका छंद विधान –

“रायजाग” ये वर्ण राखते।
छंद ‘कामदा’ धीर चाखते।।

“रायजाग” = रगण यगण जगण गुरु (212 122 121 2)

Read More »

कलाधर छंद “योग साधना”

कलाधर छंद विधान –

पाँच बार “राज” पे “गुरो” ‘कलाधरं’ सुछंद।
षोडशं व पक्ष पे विराम आप राखिए।।
ये घनाक्षरी समान छंद है प्रवाहमान।
राचिये इसे सभी पियूष-धार चाखिये।।

पाँच बार “राज” पे “गुरो” = (रगण+जगण)*5 + गुरु। (212  121)*5+2
यानी गुरु लघु की 15 आवृत्ति के बाद गुरु यानी
21×15 + 2 तथा 16 और पक्ष=15 पर यति।

Read More »

खरारी छंद “जलियाँवाला बाग”

खरारी छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 8, 6, 8, 10 मात्राओं पर यति आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 222, 222, 2222, 2 2222

Read More »

कनक मंजरी छंद “गोपी विरह”

कनक मंजरी छंद विधान:-

प्रथम रखें लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ रख लें।
सु’कनक मंजरि’ छंद रचें यति तेरह वर्ण तथा दश पे।।

लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ = 4लघु+6भगण(211)+1गुरु]=23 वर्ण

Read More »

पद्मावती छंद “दीपोत्सव”

पद्मावती छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 10, 8, 14 मात्रा पर यति आवश्यक है।
प्रथम दो अंतर्यतियों में समतुकांतता आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास –
2 2222, 2222, 2222 22 S = 10+ 8+ 14 = 32 मात्रा।

Read More »

वागीश्वरी सवैया “दया”

वागीश्वरी सवैया विधान – यह 23 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। यह सवैया यगण (122) पर आश्रित है, जिसकी 7 आवृत्ति तथा चरण के अंतमें लघु गुरु वर्ण जुड़ने से होती है।
(122 122 122 122 122 122 122 12)

Read More »

चुलियाला छंद ‘मृदु वाणी’

चुलियाला छंद विधान –

चुलियाला छंद एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसके प्रति पद में 29 मात्रा होती है। प्रत्येक पद 13, 16 मात्रा के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है। यह दोहे के जैसा ही एक द्वि पदी छंद होता है जो दोहे के अंत में 1211 ये पाँच मात्राएँ जुड़ने से बनता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है –
2222 212, 2222 21 1211 = (चुलियाला) = 13, 8-21-1211 = 29 मात्रा।

Read More »

कृपाण घनाक्षरी “विनती”

कृपाण घनाक्षरी विधान –

चार पदों के इस छंद में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 32 होती है। पद में 8, 8, 8, 8 वर्ण पर यति रखना अनिवार्य है। पद के चारों चरणों का अंत गुरु वर्ण (S) तथा लघु वर्ण (1) से होना आवश्यक है। हर यति समतुकांत होनी भी आवश्यक है।

Read More »

सुमंत छंद “बरसो मेघा”

सुमंत छंद विधान –

सुमंत छंद बीस मात्रा प्रति पद का मात्रिक छंद है।
छंद के 11 मात्रिक प्रथम चरण की मात्रा बाँट ठीक दोहे के सम चरण वाली यानी अठकल + ताल (21) है।
अठकल में 4+4 या 3+3+2 दोनों हो सकते हैं।
9 मात्रिक द्वितीय चरण की मात्रा बाँट 3 + 2 + गुरु गुरु (S S)है।

Read More »

कण्ठी छंद “सवेरा”

कण्ठी छंद विधा –

“जगाग” वर्णी।
सु-छंद ‘कण्ठी’।।

“जगाग” = जगण गुरु गुरु
121 2 2

5 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद। 4  चरण,
2-2 चरण समतुकांत

Read More »

सार छंद “महर्षि वाल्मीकि”

सार छंद जो कि ललितपद छंद के नाम से भी जाना जाता है, चार पदों का अत्यंत गेय सम-पद मात्रिक छंद है। इस में प्रति पद 28 मात्रा होती है। यति 16 और 12 मात्रा पर है।

“दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाए।
उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाए।।”

Read More »

इंदिरा छंद “पथिक”

इंदिरा छंद / राजहंसी छंद विधान:-

“नररलाग” से छंद लो तिरा।
मधुर ‘राजहंसी’ व ‘इंदिरा’।।

“नररलाग” = नगण रगण रगण + लघु गुरु

Read More »

मालिक छंद “राधा रानी”

मालिक छंद विधान –

मालिक छंद एक सम मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति चरण 20 मात्रा रहती हैं। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + अठकल + गुरु गुरु = 8, 8, 2, 2 = 20 मात्रा।

Read More »

योग छंद “विजयादशमी”

योग छंद विधान –
योग छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद 20 मात्रा रहती हैं। पद 12 और 8 मात्रा के दो यति खंडों में विभाजित रहता है।

अच्छाई जब जीती, हरा बुराई।
जग ने विजया दशमी, तभी मनाई।।

Read More »

मत्तगयंद सवैया छंद

मत्तगयंद सवैया छंद की संरचना प्रति चरण 211× 7 + 22 है।
पाप बढ़े चहुँ ओर भयानक हाथ कृपाण त्रिशूलहु धारो।
रक्त पिपासु लगे बढ़ने दुखके महिषासुर को अब टारो।

Read More »

नरहरि छंद “जय माँ दुर्गा”

नरहरि छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद १९ मात्रा रहती हैं। १४, ५ मात्रा पर यति का विधान है।
जय जग जननी जगदंबा, जय जया।
नव दिन दरबार सजेगा, नित नया।।

Read More »

आँसू छंद “कल और आज”

आँसू छंद प्रति पद 28 मात्रा का सम पद मात्रिक छंद है। छंद का पद 14 – 14 मात्रा के दो यति खण्डों में विभक्त रहता है।

भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में।
तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में।

Read More »

आल्हा छंद “अग्रवाल”

आल्हा छंद “अग्रदूत अग्रवाल”

अग्रोहा की नींव रखे थे, अग्रसेन नृपराज महान।
धन वैभव से पूर्ण नगर ये, माता लक्ष्मी का वरदान।।

Read More »

रास छंद “कृष्णावतार”

रास छंद विधान –
रास छंद 22 मात्राओं का सम पद मात्रिक छंद है जिसमें 8, 8, 6 मात्राओं पर यति होती है। पदान्त 112 से होना आवश्यक है। मात्रा बाँट प्रथम और द्वितीय यति में एक अठकल या 2 चौकल की है। अंतिम यति में 2 – 1 – 1 – 2(ऽ) की है।

Read More »
Categories