पद्ममाला छंद

“माँ के आँसू”

आँख में अश्रु लाती हो।
बाद में तू छुपाती हो।।
नैन से लो गिरे मोती।
आज तू मात क्यों रोती।।

पुत्र सारे हुए न्यारे।
जो तुझे प्राण से प्यारे।।
स्वार्थ के हैं सभी नाते।
आँख में नीर क्यों माते।।

रीत ये तो चली आई।
हैं न बेटे सगे भाई।।
व्यर्थ संसार में सारे।
नैन से क्यों झरे तारे।।

ईश की आस ही सच्ची।
और सारी सदा कच्ची।।
भक्त की टेक ले वे ही।
धीर हो सोच तू ये ही।।
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पद्ममाला छंद विधान –

“रारगागा” रखो वर्णा।
‘पद्ममाला’ रचो छंदा।।

“रारगागा” = रगण रगण गुरु गुरु।
(212  212  2 2) = 8 वर्ण का वर्णिक छंद। 4 चरण, 2-2 चरण समतुकांत।

लिंक :- वर्णिक छंद परिभाषा
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

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