प्रदीप छंद ‘यादों के झोंके’

मीठी यादों के झोंकों ने,सींचा उपवन प्रेम का,
पत्थर सम हिय भाव विरह ने,रूप दिखाया हेम का।
लम्बी दूरी पल में तय कर,सुखद स्नेह आगोश में,
झूला प्रियतम की बाहों का,झूली तन्मय जोश में।

पत्ता-पत्ता हरा हुआ है,कोमल कलियाँ झूमती,
फूलों का मृदु आलिंगन पा,ज्यूँ तितली हों चूमती।
साँसों को है भान स्नेह का,भाव नेह विस्तार से,
चित्र प्रीत से सने हुये सब,चलते चित्राहार से।

आकर मन को हल्का करती,यादें आँसूधार है,
नम आँखों से निरखूँ प्रिय को,संवादों का सार है।
रिमझिम बूँदों ने झकझोरा,अधरों के रसपान से,
निखरा सावन मन का मेरा,कोयल के मृदु गान से।

सींचे क्यारी को जीवन की,यादें पहले प्यार की,
जीने को फिर प्रेरित करती,यह बेला अभिसार की।
पुलकित हिय का कोना-कोना,मन वीणा की तान से,
निखरी आभा मुखमण्डल की,हल्की सी मुस्कान से।
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प्रदीप छन्द विधान- (मात्रिक छंद परिभाषा)

यह प्रति पद 29 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है जो 16,13 मात्राओं के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है।
दो दो पद या चारों पद समतुकांत होते हैं।

बेहतर समझने के लिये- पहला चरण चौपाई(16 मात्रा)+दूसरा चरण दोहे का विषम चरण(13 मात्रिक) होता है। दोनों चरणों का विधान और मात्रा बाँट भी ठीक चौपाई और दोहे के विषम चरण की ही रहती है। पदांत सदैव दीर्घ वर्ण रहता है।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल*2, अठकल 21 S = 16+13 = 29 मात्राएँ।
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शुचिता अग्रवाल,’शुचिसंदीप’
तिनसुकिया,असम

6 Responses

  1. प्रकृति के माध्यम से “यादों का झोका “हमें अच्छा लगा।

  2. शुचिता बहन जीवन की पुरानी स्मृतियों में डूबकर लिखी उत्कृष्ट रचना। सदैव की भाँती इस रचना के माध्यम से भी तुमने वेब साइट का परिचय एक नवीन छंद से कराया है।

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