मंजुभाषिणी छंद

“शहीद दिवस”

इस देश की भगत सिंह शान है।
सुखदेव राजगुरु आन बान है।।
हम आह आज बलिदान पे भरें।
उन वीर की चरण वन्दना करें।।

अति घोर कष्ट कटु जेल के सहे।
चढ़ फांस-तख्त पर भी हँसे रहे।।
निज प्राण देश-हित में जिन्हें दिये।
उनको लगा कर सदा रखें हिये।।

तिथि मार्च तेइस शहीद की मने।
उनके समान जन देश के बने।।
प्रण आज ये हृदय धार लें सभी।
नहिं देश का हनन गर्व हो कभी।।

हम पुष्प अर्पित समाधि पे करें।
इस देश की सब विपत्तियाँ हरें।।
यह भाव-अंजलि सही तभी हुये।
जब विश्व भी चरण देश के छुये।।================
मंजुभाषिणी छंद विधान:- (वर्णिक छंद परिभाषा)

“सजसाजगा” रचत ‘मंजुभाषिणी’।
यह छंद है अमिय-धार वर्षिणी।।

“सजसाजगा” = सगण जगण सगण जगण गुरु

112 121 112 121+गुरु = कुल 13 वर्ण की वर्णिक छंद।
चार चरण, दो दो समतुकांत।
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

10 Responses

  1. भगतसिंह के शौर्य की गाथा को मंजुभाषिणी वर्णिक छन्द विधान के अंतर्गत उकेर कर उसमें अपने भावों को पूर्णतः समेट कर आपने श्रेष्ठता का परिचय दिया है।
    आपकी लेखनी पर सदैव माँ शारदे की कृपा बनी रहे ।

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