विधाता छंद

“नव वर्ष स्वागत गीत”

वाचिक भार  = 1222*4

लगा नव वर्ष बाइस का, करें मिल उसका हम स्वागत;
नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।
करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;
नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।

मिला के हाथ सब से ही, सभी को दें बधाई हम;
जहाँ हम बाँटते खुशियाँ, वहीं बाँटें सभी के ग़म।
करें संकल्प सब मिल के, उठाएँगे गिरें हैं जो;
तभी कुछ कर गुजरने का, नया इक जोश छाएगा।

दिलों में मैल है बाकी, पुराने साल का कुछ गर;
मिटाएँ उसको पहले हम, नये रिश्तों से सब जुड़ कर।
कसक मन की मिटा करके, दिखावे को परे रख के;
दिलों की गाँठ को खोलें, तभी नव वर्ष भाएगा।

गरीबी ओ अमीरी के, मिटाएँ भेद भावों को;
अशिक्षित ना रहे कोई, करें खुशहाल गाँवों को।
‘नमन’ नव वर्ष में जागें, ये सपने सब सजा दिल में;
तभी ये देश खुशियों के, सुहाने गीत गाएगा।

***   ***

विधाता छंद विधान – (वाचिक स्वरूप)

विधाता छंद 28 मात्रा प्रति पद का सम पद मात्रिक छंद है जो 14 – 14 मात्रा के दो यति खंडों में विभक्त रहता है।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

4 Responses

  1. नव वर्ष की बहुत उच्च कोटि की कामनाएं समेटे हुए आपकी रचना है। शुम नव वर्ष।

  2. विधाता छंद में नव वर्ष के आगमन पर मन में उमंग एवं हर्ष का उद्घोष करता सुंदर मनभावन गीत सृजन हुआ है।

    मंच पर विशेष अवसर जैसे होली, दीवाली, राखी, महापुरुषों की जयंती आदि विषयों पर कविता लेखन द्वारा उत्सव सा प्रतीत होता है जिससे मन में लेखन के प्रति नए जोश का संचार होता है।
    कविकुल वेबसाइट के सभी पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूँ।

    1. शुचिता बहन मेरी नव वर्ष की रचना पर तुम्हारी भावभीनी प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।
      किसी भी विशेष अवसर पर उस अवसर से संबंधित रचना का अलग ही प्रभाव होता है।

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