शक्ति छंद

“फकीरी”

फकीरी हमारे हृदय में खिली।
बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।
कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।
किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।

वृषभ से पड़ें हम रहें हर कहीं।
जहाँ मन, बसेरा जमा लें वहीं।।
बना हाथ तकिया टिका माथ लें।
उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।

मिले जो उसीमें गुजारा करें।
मिले कुछ न भी तो न आहें भरें।।
कमंडल लिये हाथ में हम चलें।
इसी के सहारे सदा हम पलें।

जगत से न संबंध कुछ भी रखें।
स्वयं में रमे स्वाद सारे चखें।।
सुधा सम समझ के गरल सब पिएँ।
रखें आस भगवान की बस जिएँ।।
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शक्ति छंद विधान – (मात्रिक छंद परिभाषा)

यह (122 122 122 12) मापनी पर आधारित 18 मात्रा का मात्रिक छंद है। चूंकि यह एक मात्रिक छंद है अतः गुरु (2) वर्ण को दो लघु (11) में तोड़ने की छूट है। दो दो चरण समतुकांत होने चाहिए।
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

9 Responses

  1. “फकीरी” कविता के माध्यम से अनासक्ति का अच्छा उदाहरण , सटीक वर्ण और मात्रा का प्रयोग , अद्भुत।

    आपकी जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं ।। आदरनीय।।

    1. आदरणीय कृष्ण कुमार शर्मा जी आपकी फकीरी कविता पर प्रतिक्रिया का अतिसय आभार। प्रबुद्ध पाठकों के उत्साह वर्धक कामेंट रचनाकरों के लिए संजीवनी का काम करते हैं। आप क्या लेखन क्षेत्र में भी हैं। अपने बारे में कुछ बताएँ।

      मेरे जन्म दिवस पर शुभकामना देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

      1. मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं लेखन क्षेत्र में नहीं हूं। आपकी रचनाएं पढ़कर , विधान समझकर कुछ लिखने का निष्फल प्रयास करता हूं।
        मुझे जानने के लिए आपका धन्यवाद।

        1. श्रेष्ठ लेखक वही होता है जो पहले श्रेष्ठ श्रोता एवं पाठक होता है।
          आपकी प्रतिक्रियाओं से यह तो समझ आ गया कि आपमे ये गुण बखूबी है। लेखक बनने में वक्त नहीं लगेगा,कोशिश करते रहें।

        2. आप चौपाई छंद पर प्रयास कीजिए जो यहाँ विस्तार से समझाया गया है और इस छंद के कामेंट में यहां डाल दें।
          आप यहाँ अपनी लाग इन आई डी बना सकते हैं जिससे आपके कामेंट एक जगह संग्रहित हो जायेंगे

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