संयुत छंद

“फाग रस”

सब झूम लो रस राग में।
मिल मस्त हो कर फाग में।।
खुशियों भरा यह पर्व है।
इसपे हमें अति गर्व है।।

यह मास फागुन चाव का।
ऋतुराज के मधु भाव का।।
हर और दृश्य सुहावने।
सब कूँज वृक्ष लुभावने ।।

मन से मिटा हर क्लेश को।
उर में रखो मत द्वेष को।।
क्षण आज है न विलाप का।
यह पर्व मेल-मिलाप का।।

मन से जला मद-होलिका।
धर प्रेम की कर-तूलिका।।
हम मग्न हों रस रंग में।
सब झूम फाग उमंग में।।
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संयुत छंद विधान:- (वर्णिक छंद परिभाषा)

“सजजाग” ये दश वर्ण दो।
तब छंद ‘संयुत’ स्वाद लो।।

“सजजाग” = सगण जगण जगण गुरु
112 121 121 2 = 10 वर्ण
चार चरण। दो दो समतुकांत
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

8 Responses

  1. “रचना बड़ी यह खास है।
    लगता कि फागुन मास है।।
    हर दृश्य अंकित है किया।
    मन मोह लेखन ने लिया”

    विधान सहित संयुत छंद से परिचित कराने के लिये आभार आपका भैया। साथ ही आपकी रचना पढ़कर पूरे छंद को समझा जा सकता है।
    कविकुल वेबसाइट सीखने एवं सिखाने के लिये सर्वोत्तम है।

  2. जितनी मस्त फागुनी छटा उतना ही मोहक छंद में वर्णन।

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