शंकर छंद, ‘नश्वर काया’
शंकर छंद 26 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। चार पदों के इस छंद में दो-दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + अठकल, सतकल + गुरु + लघु
शंकर छंद – 8 + 8, 7 + 2 + 1 (16+10)
शंकर छंद 26 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। चार पदों के इस छंद में दो-दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + अठकल, सतकल + गुरु + लघु
शंकर छंद – 8 + 8, 7 + 2 + 1 (16+10)
मरहठा माधवी छंद 29 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + त्रिकल, त्रिकल + गुरु + त्रिकल, त्रिकल + गुरु + गुरु + लघु + गुरु(S)
अहीर छंद 11 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत जगण 121 से होना आवश्यक है। इन 11 मात्राओं का विन्यास ठीक दोहा छंद के 11 मात्रिक सम चरण जैसा है बस 8वीं मात्रा सदैव लघु रहे।
विद्या छंद 28 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
122 (यगण)+ लघु + त्रिकल + चौकल + लघु , गुरु + छक्कल + लघु + लघु + गुरु + गुरु
1221 3 221, 2 2221 1SS
धारा छंद 29 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + छक्कल + लघु, अठकल + छक्कल(S)
2222 2221, 2222 222 (S)
दंडकला छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।
प्रत्येक पद 10,8,14 मात्राओं के तीन यति खंडों में विभाजित रहता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
गुरु + अठकल, अठकल, अठकल + गुरु + लघु + लघु + गुरु
महाश्रृंगार छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जो 16 16 मात्रा के दो यति खण्ड में विभक्त रहता है। 16 मात्रा के यति खण्ड की मात्रा बाँट ठीक श्रृंगार छंद वाली है, जो 3 – 2 – 8 – 21(ताल) है।
रुचिरा छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।प्रत्येक पद 14,16 मात्राओं के दो यति खंडों में विभाजित रहता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + छक्कल, गुरु + अठकल + छक्कल
2222 222, 2 2222 222(S)
कर्ण छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। चार पदों के इस छंद में चारों या दो दो पद समतुकांत होते हैं।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 2222 21, 12221 122 22 (SS)
शोकहर छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2222, 2222, 2222, 222 (S)
8+8+8+6 = 30 मात्रा।
कमंद छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + छक्कल + लघु, यगण(122) +अठकल + गुरु गुरु (SS)
किशोर छंद विधान –
किशोर छंद मूल रूप से एक मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक पद मे 22 मात्राएँ होती हैं तथा यति 16 व 6 मात्राओं पर होती है।
तंत्री छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। प्रत्येक पद क्रमशः 8, 8, 6, 10 मात्राओं के चार यति खंडों में विभाजित रहता है।
2222, 2222, 222, 2 2222
लीलावती छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 2222 3 21, 2 2222 3 21
खरारी छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 8, 6, 8, 10 मात्राओं पर यति आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 222, 222, 2222, 2 2222
पद्मावती छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 10, 8, 14 मात्रा पर यति आवश्यक है।
प्रथम दो अंतर्यतियों में समतुकांतता आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास –
2 2222, 2222, 2222 22 S = 10+ 8+ 14 = 32 मात्रा।
चुलियाला छंद विधान –
चुलियाला छंद एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसके प्रति पद में 29 मात्रा होती है। प्रत्येक पद 13, 16 मात्रा के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है। यह दोहे के जैसा ही एक द्वि पदी छंद होता है जो दोहे के अंत में 1211 ये पाँच मात्राएँ जुड़ने से बनता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है –
2222 212, 2222 21 1211 = (चुलियाला) = 13, 8-21-1211 = 29 मात्रा।
सुमंत छंद विधान –
सुमंत छंद बीस मात्रा प्रति पद का मात्रिक छंद है।
छंद के 11 मात्रिक प्रथम चरण की मात्रा बाँट ठीक दोहे के सम चरण वाली यानी अठकल + ताल (21) है।
अठकल में 4+4 या 3+3+2 दोनों हो सकते हैं।
9 मात्रिक द्वितीय चरण की मात्रा बाँट 3 + 2 + गुरु गुरु (S S)है।
सार छंद जो कि ललितपद छंद के नाम से भी जाना जाता है, चार पदों का अत्यंत गेय सम-पद मात्रिक छंद है। इस में प्रति पद 28 मात्रा होती है। यति 16 और 12 मात्रा पर है।
“दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाए।
उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाए।।”
मालिक छंद विधान –
मालिक छंद एक सम मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति चरण 20 मात्रा रहती हैं। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + अठकल + गुरु गुरु = 8, 8, 2, 2 = 20 मात्रा।

नाम– बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
निवास स्थान – तिनसुकिया (असम)
रुचि – काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वर्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न।
सम्मान– मेरी रचनाएँ देश की सम्मानित वेब पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं।