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इस वेब साइट को “कविकुल” जैसा सार्थक नाम दे कर निर्मित करने का प्रमुख उद्देश्य हिन्दी भाषा के कवियों को  एक सशक्त मंच उपलब्ध कराना है जहाँ वे अपनी रचनाओं को प्रकाशित कर सकें उन रचनाओं की उचित समीक्षा हो सके, साथ में सही मार्ग दर्शन हो सके और प्रोत्साहन मिल सके।

यह “कविकुल” वेब साइट उन सभी हिन्दी भाषा के कवियों को समर्पित है जो हिन्दी को उच्चतम शिखर पर पहुँचाने के लिये जी जान से लगे हुये हैं जिसकी वह पूर्ण अधिकारिणी है। आप सभी का इस नयी वेब साइट “कविकुल” में हृदय की गहराइयों से स्वागत है।

“यहाँ काव्य की रोज बरसात होगी।
कहीं भी न ऐसी करामात होगी।
नहाओ सभी दोस्तो खुल के इसमें।
बड़ी इससे क्या और सौगात होगी।।”

चोखो भारत (राजस्थानी)

म्हारो भारत घणो है चोखो,
सगळै जग सै यो है अनोखो।
ई री शोभा ताराँ सै झिलमिल,
जस गावाँ आपाँ सब हिलमिल।

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लावणी छंद ‘एक चिट्ठी माँ के नाम’

लावणी छंद ‘एक चिट्ठी माँ के नाम’ लिखने बैठी माँ को चिट्ठी, हाल सभी बतलाती है। नन्हे मन की अति व्याकुलता, खोल हृदय दिखलाती है।।

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मनोरम छंद “वीर सैनिक”

मनोरम छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। यह मानव जाति का छंद है। इन 14 मात्राओं की मात्रा बाँट:-
S122 21SS या S122 21S11 है।

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लावणी छंद  ‘दिल मेरा ही छला गया’

लावणी छंद (गीत) ‘दिल मेरा ही छला गया’ क्यूँ शब्दों के जादूगर से, दिल मेरा ही छला गया। उमड़ घुमड़ बरसाया पानी, बादल था वो

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शृंगार छंद “सुख और दुख”

शृंगार छंद बहुत ही मधुर लय का 16 मात्रा का चार चरण का छंद है। तुक दो दो चरण में है। इसकी मात्रा बाँट 3 – 2 – 8 – 3 (ताल) है।

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विष्णुपद छंद  ‘मंजिल पायेंगे’

विष्णुपद छंद ‘मंजिल पायेंगे’ आगे हरदम बढ़ने का हम, लक्ष्य बनायेंगे। चाहे रोड़े हों राहों में, मंजिल पायेंगे।। नवल सपन आँखों में लेकर, हम सोपान

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मनविश्राम छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

मनविश्राम छंद “माखन लीला”

मनविश्राम छंद विधान –

“भाभभुभाभनुया” यति दें, दश रुद्र वरण अभिरामा।
छंद रचें कवि वृन्द सभी, मनभावन ‘मनविशरामा’।।

“भाभभुभाभनुया” = भगण की 5 आवृत्ति फिर नगण यगण।

211 211 211 2,11 211 111 122 = कुल 21 वर्ण का वर्णिक छंद, यति 10 और 11 वर्ण।

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सरसी छंद ‘मुन्ना मेरा सोय’

सरसी छंद ‘मुन्ना मेरा सोय’ ओ मेघा चुप हो जा मेघा, मुन्ना मेरा सोय। खिल-खिल हँसता कभी मुलकता, मधुर स्वप्न में खोय।। घड़-घड़ भड़-भड़ जोर-जोर

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मनमोहन छंद “राजनीति”

मनमोहन छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत नगण (111) से होना आवश्यक है। इसमें 8 और 6 मात्राओं पर यति अनिवार्य है।

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