सरसी छंद ‘हे नाथ’

“सरसी छंद”

करो कृपा हे नाथ विनय मैं, करती बारम्बार।
श्रद्धा तुझमें बढ़ती जाये, तुम जीवन सुखसार।।

कृपाण घनाक्षरी “विनती”

कृपाण घनाक्षरी विधान –

चार पदों के इस छंद में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 32 होती है। पद में 8, 8, 8, 8 वर्ण पर यति रखना अनिवार्य है। पद के चारों चरणों का अंत गुरु वर्ण (S) तथा लघु वर्ण (1) से होना आवश्यक है। हर यति समतुकांत होनी भी आवश्यक है।

सिंहनाद छंद “विनती”

सिंहनाद छंद विधान –

“सजसाग” वर्ण दश राखो।
तब ‘सिंहनाद’ मधु चाखो।।

“सजसाग” = सगण जगण सगण गुरु।