निश्चल छंद, ‘ऋतु शीत’

निश्चल छंद 23 मात्रा प्रति पद की सम मात्रिक छंद है।
यह 16 और 7 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहती है। दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2222 2222, 22S1

वंशस्थ छंद “शीत-वर्णन”

वंशस्थ छंद विधान –

“जताजरौ” द्वादश वर्ण साजिये।
प्रसिद्ध ‘वंशस्थ’ सुछंद राचिये।।

“जताजरौ” = जगण, तगण, जगण, रगण