मनहरण घनाक्षरी विधान :- (घनाक्षरी विवेचन)

मनहरण को घनाक्षरी छंदों का सिरमौर कहें तो अनुचित नहीं होगा। चार पदों के इस छन्द में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 31 होती है। घनाक्षरी एक वर्णिक छंद है अतः वर्णों की संख्या 31 वर्ण से न्यूनाधिक नहीं हो सकती। चारों पदों में समतुकांतता होनी आवश्यक है। 31 वर्ण लंबे पद में 16, 15 पर यति रखना अनिवार्य है। पदान्त हमेशा दीर्घ वर्ण ही रहता है।

परन्तु देखा गया है कि 8,8,8,7 के क्रम में यति तथा पदान्त ह्रस्व-दीर्घ (12) रखने से वाचन में सहजता और अतिरिक्त निखार अवश्य आता है। पर ये दोनों ही बातें विधानानुसार आवश्यक नहीं है।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

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