विजात छंद
“उदंडी”
हृदय में एकता धारे।
सजग होके रहें सारे।।
रखें ये देश ऊँचा हम।
यहाँ जो व्याप्त हर लें तम।।
प्रखर विद्रोह के हैं स्वर।
लगें भीषण हमें ये ज्वर।।
विरोधी के सभी उत्तर।
मिले बरसा यहाँ पत्थर।।
प्रबल अलगाववादी हैं।
कलह के नित्य आदी हैं।।
इन्हें चिंता न भारत की।
करें बातें शरारत की।।
विषमतायें यहाँ भारी।
मगर हिम्मत न हम हारी।।
हतोत्साहित न हों थोड़ा।
हटायें राह के रोड़ा।।
मनोबल को रखें उन्नत।
सदा जिनसे हुयें आहत।।
करें उनका पराक्रम क्षय।
मिलेगी जीत बिन संशय।।
उदंडी दंड को पायें।
धरा का न्याय अपनायें।।
रहे मन में न अब दूरी ।
‘नमन’ यह चाह हो पूरी।।
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विजात छंद विधान –
विजात छंद 14 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। यह मानव जाति का छंद है। एक छंद में कुल 4 चरण होते हैं और छंद के दो दो या चारों चरण सम तुकांत होने चाहिए। यह एक मापनी आधारित छंद है। इन 14 मात्राओं की मात्रा बाँट:- 1222 1222 है। चूंकि यह मात्रिक छंद है अतः 2 को 11 करने की छूट है।
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ ©
तिनसुकिया

नाम- बासुदेव अग्रवाल;
जन्म दिन – 28 अगस्त, 1952;
निवास स्थान – तिनसुकिया (असम)
रुचि – काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि।
सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्र और अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं। हिन्दी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं।
प्रकाशित पुस्तकें- गूगल प्ले स्टोर पर मेरी दो निशुल्क ई बुक प्रकाशित हैं।
(1) “मात्रिक छंद प्रभा” जिसकी गूगल बुक आइ डी :- 37RT28H2PD2 है। (यह 132 पृष्ठ की पुस्तक है जिसमें मात्रिक छंदों की मेरी 91 कविताएँ विधान सहित संग्रहित हैं। पुस्तक के अंत में ‘मात्रिक छंद कोष’ दिया गया है जिसमें 160 के करीब मात्रिक छंद विधान सहित सूचीबद्ध हैं।)
(2) “वर्णिक छंद प्रभा” जिसकी गूगल बुक आइ डी :- 509X0BCCWRD है। (यह 134 पृष्ठ की पुस्तक है जिसमें वर्णिक छंदों की मेरी 95 कविताएँ विधान सहित संग्रहित हैं। पुस्तक के अंत में ‘वर्णिक छंद कोष’ दिया गया है जिसमें 430 के करीब वर्णिक छंद विधान सहित सूचीबद्ध हैं।)
मेरा ब्लॉग:
बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति भैया।
शुचिता बहन तुम्हारी प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद।
बहुत प्यारी समसामयिक कविता।
आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक धन्यवाद।