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कुलदेवी पर दोहे

प्रथम विनायक को भजें, प्रभु का लें फिर नाम।।
कुलदेवी जयकार से, शुरू करें शुभ काम।।

सर्व सुमंगल दायिनी, हे कुलदेवी मात।
कुल तेरा तुझको भजे, कर जोड़े दिन-रात।।

कुलदेवी आशीष से, बनते बिगड़े काज।
निज कुल की माँ जगत में, रखती हरदम लाज।।

रखें स्मरण कुलदेव का, धर्म सनातन रीत।
सुखपूर्वक जीवन रहे, मिले सदा ही जीत।।

धूप, दीप, घृत, पुष्प लें, चंदन और कपूर।
पूजन थाली से रखें, खंडित अक्षत दूर।।

पान, सुपारी, लौंग, जल, चढ़े मधुर गुलकंद।
विधिवत पूजन जो करे, कटे जगत के फंद।।

दोहा छंद विधान

 

 

शुचिता अग्रवाल ‘शुचिसंदीप’
तिनसुकिया, असम

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