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Category: सार छंद

सार छंद “महर्षि वाल्मीकि”

सार छंद विधान –
सार छंद चार पदों का अत्यंत गेय सम-पद मात्रिक छंद है। प्रति पद 28 मात्रा होती है। यति 16 और 12 मात्रा पर है।
“दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाए।
उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाए।।”

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