Categories
Archives

Category: छंद

लावणी छंद “राधा-कृष्ण”

लावणी छंद “राधा-कृष्ण”

लता, फूल, रज के हर कण में, नभ से झाँक रहे घन में।
राधे-कृष्णा की छवि दिखती, वृन्दावन के निधिवन में।।
राधा-माधव युगल सलोने, निशदिन वहाँ विचरते हैं।
प्रेम सुधा बरसाने भू पर, लीलाएँ नित करते हैं।।

Read More »

वसन्ततिलका छंद “मनोकामना”

वसन्ततिलका छंद विधान –

“ताभाजजागगु” गणों पर वर्ण राखो।
प्यारी ‘वसन्ततिलका’ तब छंद चाखो।।

“ताभाजजागगु” = तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु।

Read More »

लीला छंद “शराब लत”

लीला छंद विधान –

लीला छंद बारह मात्रा प्रति पद का मात्रिक छंद है जिसका चरणान्त जगण (121) से होना अनिवार्य होता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + जगण(121) =12 मात्राएँ।

Read More »

मुक्तामणि छंद “गणेश वंदन”

मुक्तामणि छंद विधान –

दोहे का लघु अंत जब, सजता गुरु हो कर के।
‘मुक्तामणि’ प्रगटे तभी, भावों माँहि उभर के।।

मुक्तामणि छंद चार पदों का 25 मात्रा प्रति पद का सम पद मात्रिक छंद है जो 13 और 12 मात्रा के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है।

Read More »

हंसगति छंद “भारत”

हंसगति छंद विधान –

हंसगति छंद बीस मात्रा प्रति पद का मात्रिक छंद है जिसमें ग्यारहवीं और नवीं मात्रा पर विराम होता है। प्रथम चरण की मात्रा बाँट ठीक दोहे के सम चरण वाली तथा 9 मात्रिक द्वितीय चरण की मात्रा बाँट 3 + 2 + 4 है।

Read More »

मालिनी छंद “हनुमत स्तुति”

मालिनी छंद विधान –

“ननिमयय” गणों में, ‘मालिनी’ छंद जोड़ें।
यति अठ अरु सप्ता, वर्ण पे आप तोड़ें।।

“ननिमयय” = नगण, नगण, मगण, यगण, यगण।
111 111 22,2 122 122

Read More »

शास्त्र छंद “सदाचार”

शास्त्र छंद विधान –

शास्त्र छंद 1222 1222 1221 मापनी पर आधारित 20 मात्रा प्रति चरण का मात्रिक छंद है।

Read More »

शार्दूलविक्रीडित छंद

शार्दूलविक्रीडित छंद विधान –

“मैं साजूँ सतताग” वर्ण दश नौ, बारा व सप्ता यतिम्।
राचूँ छंद रसाल चार पद की, ‘शार्दूलविक्रीडितम्’।।

“मैं साजूँ सतताग” = मगण, सगण, जगण, सगण, तगण, तगण और गुरु।
222  112  121 112// 221  221  2

Read More »

यशोदा छंद “प्यारी माँ”

यशोदा छंद विधान –

रखो “जगोगा” ।
रचो ‘यशोदा’।।

“जगोगा” = जगण, गुरु गुरु 
121 2 2= 5 वर्ण की वर्णिक छंद।

Read More »

शैलसुता छंद “जीवन पथ”

शैलसुता छंद विधान – 

शैलसुता छंद चार चरण का वर्णिक छंद होता है जिसमें दो- दो चरण समतुकांत होते हैं।

4 लघु + 6भगण (211)
+1 गुरु = 23 वर्ण

1111 + 211*6 + 2

Read More »

रूपमाला छंद “राम महिमा”

रूपमाला छंद / मदन छंद विधान –

रूपमाला छंद जो कि मदन छंद के नाम से भी जाना जाता है, 24 मात्रा प्रति पद का सम-पद मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक पद में 14 और 10 के विश्राम से 24 मात्राएँ और पदान्त गुरु-लघु से होता है।

Read More »

शक्ति छंद “फकीरी”

शक्ति छंद विधान –

यह (122 122 122 12) मापनी पर आधारित 18 मात्रा का मात्रिक छंद है। चूंकि यह एक मात्रिक छंद है अतः गुरु (2) वर्ण को दो लघु (11) में तोड़ने की छूट है।

Read More »

उड़ियाना छंद “विरह”

उड़ियाना छंद विधान –

उड़ियाना छंद 22 मात्रा का सम मात्रिक छंद है। यह प्रति पद 22 मात्रा का छंद है। इस में 12,10 मात्रा पर यति विभाजन है। यति से पहले त्रिकल आवश्यक।

Read More »

कुकुभ छंद “शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय”

कुकुभ छंद विधान –

कुकुभ छंद सम-मात्रिक छंद है। इस चार पदों के छंद में प्रति पद 30 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पद 16 और 14 मात्रा के दो चरणों में बंटा हुआ रहता है। 14 मात्रिक चरण की अंतिम 4 मात्रा सदैव 2 गुरु (SS) होती हैं तथा बची हुई 10 मात्राएँ अठकल + द्विकल होती हैं।

Read More »

जनहरण घनाक्षरी “ब्रज-छवि”

जनहरण घनाक्षरी विधान :-

चार पदों के इस छन्द में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 31 होती है। इसमें पद के प्रथम 30 वर्ण लघु रहते हैं तथा केवल पदान्त दीर्घ रहता है।

Read More »

सिंहनाद छंद “विनती”

सिंहनाद छंद विधान –

“सजसाग” वर्ण दश राखो।
तब ‘सिंहनाद’ मधु चाखो।।

“सजसाग” = सगण जगण सगण गुरु।

Read More »

गिरिधारी छंद “दृढ़ संकल्प”

गिरिधारी छंद विधान –

“सनयास” अगर तू सूत्र रखे।
तब छंदस ‘गिरिधारी’ हरखे।।

“सनयास” = सगण, नगण, यगण, सगण

Read More »
Categories