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Category: छंद

चुलियाला छंद ‘मृदु वाणी’

चुलियाला छंद विधान –

चुलियाला छंद एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसके प्रति पद में 29 मात्रा होती है। प्रत्येक पद 13, 16 मात्रा के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है। यह दोहे के जैसा ही एक द्वि पदी छंद होता है जो दोहे के अंत में 1211 ये पाँच मात्राएँ जुड़ने से बनता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है –
2222 212, 2222 21 1211 = (चुलियाला) = 13, 8-21-1211 = 29 मात्रा।

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कृपाण घनाक्षरी “विनती”

कृपाण घनाक्षरी विधान –

चार पदों के इस छंद में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 32 होती है। पद में 8, 8, 8, 8 वर्ण पर यति रखना अनिवार्य है। पद के चारों चरणों का अंत गुरु वर्ण (S) तथा लघु वर्ण (1) से होना आवश्यक है। हर यति समतुकांत होनी भी आवश्यक है।

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सुमंत छंद “बरसो मेघा”

सुमंत छंद विधान –

सुमंत छंद बीस मात्रा प्रति पद का मात्रिक छंद है।
छंद के 11 मात्रिक प्रथम चरण की मात्रा बाँट ठीक दोहे के सम चरण वाली यानी अठकल + ताल (21) है।
अठकल में 4+4 या 3+3+2 दोनों हो सकते हैं।
9 मात्रिक द्वितीय चरण की मात्रा बाँट 3 + 2 + गुरु गुरु (S S)है।

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कण्ठी छंद “सवेरा”

कण्ठी छंद विधा –

“जगाग” वर्णी।
सु-छंद ‘कण्ठी’।।

“जगाग” = जगण गुरु गुरु
121 2 2

5 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद। 4  चरण,
2-2 चरण समतुकांत

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सार छंद “महर्षि वाल्मीकि”

सार छंद जो कि ललितपद छंद के नाम से भी जाना जाता है, चार पदों का अत्यंत गेय सम-पद मात्रिक छंद है। इस में प्रति पद 28 मात्रा होती है। यति 16 और 12 मात्रा पर है।

“दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाए।
उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाए।।”

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इंदिरा छंद “पथिक”

इंदिरा छंद / राजहंसी छंद विधान:-

“नररलाग” से छंद लो तिरा।
मधुर ‘राजहंसी’ व ‘इंदिरा’।।

“नररलाग” = नगण रगण रगण + लघु गुरु

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मालिक छंद “राधा रानी”

मालिक छंद विधान –

मालिक छंद एक सम मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति चरण 20 मात्रा रहती हैं। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + अठकल + गुरु गुरु = 8, 8, 2, 2 = 20 मात्रा।

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योग छंद “विजयादशमी”

योग छंद विधान –
योग छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद 20 मात्रा रहती हैं। पद 12 और 8 मात्रा के दो यति खंडों में विभाजित रहता है।

अच्छाई जब जीती, हरा बुराई।
जग ने विजया दशमी, तभी मनाई।।

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मत्तगयंद सवैया छंद

मत्तगयंद सवैया छंद की संरचना प्रति चरण 211× 7 + 22 है।
पाप बढ़े चहुँ ओर भयानक हाथ कृपाण त्रिशूलहु धारो।
रक्त पिपासु लगे बढ़ने दुखके महिषासुर को अब टारो।

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नरहरि छंद “जय माँ दुर्गा”

नरहरि छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद १९ मात्रा रहती हैं। १४, ५ मात्रा पर यति का विधान है।
जय जग जननी जगदंबा, जय जया।
नव दिन दरबार सजेगा, नित नया।।

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आँसू छंद “कल और आज”

आँसू छंद प्रति पद 28 मात्रा का सम पद मात्रिक छंद है। छंद का पद 14 – 14 मात्रा के दो यति खण्डों में विभक्त रहता है।

भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में।
तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में।

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आल्हा छंद “अग्रवाल”

आल्हा छंद “अग्रदूत अग्रवाल”

अग्रोहा की नींव रखे थे, अग्रसेन नृपराज महान।
धन वैभव से पूर्ण नगर ये, माता लक्ष्मी का वरदान।।

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रास छंद “कृष्णावतार”

रास छंद विधान –
रास छंद 22 मात्राओं का सम पद मात्रिक छंद है जिसमें 8, 8, 6 मात्राओं पर यति होती है। पदान्त 112 से होना आवश्यक है। मात्रा बाँट प्रथम और द्वितीय यति में एक अठकल या 2 चौकल की है। अंतिम यति में 2 – 1 – 1 – 2(ऽ) की है।

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दिंडी छंद ‘सुख सार’

दिंडी छंद विधान –

दिंडी छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद १९ मात्रा रहती हैं जो ९ और १० मात्रा के दो यति खंडों में विभाजित रहती हैं।दोनों चरणों की मात्रा बाँट निम्न प्रकार से है।

त्रिकल, द्विकल, चतुष्कल = ३ २ ४ = ९ मात्रा।
छक्कल, दो गुरु वर्ण (SS) = १० मात्रा।

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कुण्डलिया छंद “विधान”

कुण्डलिया छंद “विधान”

कुण्डलिया छंद दोहा छंद और रोला छंद के संयोग से बना विषम छंद है। इस छंद में ६ पद होते हैं तथा प्रत्येक पद में २४ मात्राएँ होती हैं। यह छंद दो छंदों के मेल से बना है जिसके पहले दो पद दोहा छंद के तथा शेष चार पद रोला छंद से बने होते हैं।

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तमाल छंद “जागो हिन्दू”

तमाल छंद विधान –

तमाल छंद एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद १९ मात्रा रहती हैं। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
चौपाई + गुरु लघु (16+3=19)

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सुमेरु छंद “माँ”

सुमेरु छंद विधान –

सुमेरु छंद 1222 1222 122 मापनी का एक सम पद मात्रिक छंद है, जिसमें प्रति पद १९ मात्रा रहती हैं। सुमेरु छंद में 12,7 अथवा 10,9 पर दो तरह से यति निर्वाह किया जा सकता है।

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दोहा छंद “श्राद्ध-पक्ष”

दोहा छंद “श्राद्ध-पक्ष”

श्राद्ध पक्ष में दें सभी, पुरखों को सम्मान।
वंदन पितरों का करें, उनका धर सब ध्यान।।

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रोला छंद विधान

रोला छंद विधान –

रोला छंद चार पदों का सम मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक पद में 24 मात्रा तथा पदान्त गुरु अथवा 2 लघु से होना आवश्यक है।

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दोहा छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

दोहा छंद विधान

दोहा छंद विधान –

दोहा एक अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। यह द्विपदी छंद है जिसके प्रति पद में 24 मात्रा होती है।प्रत्येक पद 13, 11 मात्रा के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है।

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