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Category: छंद

कलहंस छंद “तुलसी चरित”

कलहंस छंद विधान –

यह 18 मात्राओं का मात्रिक छंद है। दो-दो चरण या चारों चरण समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

द्विकल+चौपाई (16 मात्रा)= 18मात्राएँ।

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गाथ छंद ‘वृक्ष पीड़ा’

गाथ छंद विधान –

सूत्र राच “रसोगागा”।
‘गाथ’ छंद मिले भागा।।

“रसोगागा” = रगण, सगण, गुरु गुरु

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मदिरा सवैया ‘विदाई सीख’

मदिरा सवैया विधान –

यह 22 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। यह सवैया भगण (211) पर आश्रित है, जिसकी 7 आवृत्ति और अंत में गुरु प्रति चरण में रहता है। इसकी संरचना 211× 7 + 2 है।

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निधि छंद “सुख-सार”

निधि छंद विधान –

यह नौ मात्रा का सम मात्रिक चार चरणों का छंद है। इसका चरणान्त ताल यानी गुरु लघु से होना आवश्यक है। बची हुई 6 मात्राएँ छक्कल होती हैं।

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तोमर छंद “अव्यवस्था”

तोमर छंद विधान –

यह 12 मात्रा का सम मात्रिक छंद है। अंत ताल से आवश्यक। इसकी मात्रा बाँट:- द्विकल-सप्तकल-3 (केवल 21)

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स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति”

स्त्रग्धरा छंद विधान –

“माराभाना ययाया”, त्रय-सत यति दें, वर्ण इक्कीस या में।
बैठा ये सूत्र न्यारा, मधुर रसवती, ‘स्त्रग्धरा’ छंद राचें।।

“माराभाना ययाया”= मगण, रगण, भगण, नगण, तथा लगातार तीन यगण। (कुल 21 अक्षरी)

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वंशस्थ छंद “शीत-वर्णन”

वंशस्थ छंद विधान –

“जताजरौ” द्वादश वर्ण साजिये।
प्रसिद्ध ‘वंशस्थ’ सुछंद राचिये।।

“जताजरौ” = जगण, तगण, जगण, रगण

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शिखरिणी छंद “भारत वंदन”

शिखरिणी छंद विधान –

रखें छै वर्णों पे, यति “यमनसाभालग” रचें।
चतुष् पादा छंदा, सब ‘शिखरिणी’ का रस चखें।।

“यमनसाभालग” = यगण, मगण, नगण, सगण, भगण लघु गुरु ( कुल 17 वर्ण)

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मंदाक्रान्ता छंद “लक्ष्मी स्तुति”

मंदाक्रान्ता छंद विधान –

“माभानाता,तगग” रच के, चार छै सात तोड़ें।
‘मंदाक्रान्ता’, चतुष पद की, छंद यूँ आप जोड़ें।।

“माभानाता, तगग” = मगण, भगण, नगण, तगण, तगण, गुरु गुरु (कुल 17 वर्ण)

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दीप छंद “राम-भजन”

दीप छंद विधान –

“चौकल नगण व्याप्त,
गुरु-लघु कर समाप्त,
रच लो मधुर ‘दीप’,
लगती चपल सीप।”

चौकल, नगण(111) गुरु लघु (S1) = 10 मात्रायें।

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पुटभेद छंद “बसंत-छटा”

पुटभेद छंद विधान –

“राससाससुलाग” सुछंद रचें अति पावनी।
वर्ण सप्त दशी ‘पुटभेद’ बड़ी मन भावनी।।

“राससाससुलाग” = रगण सगण सगण सगण सगण लघु गुरु।

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पुण्डरीक छंद “राम-वंदन”

पुण्डरीक छंद विधान –

“माभाराया” गण से मिले दुलारी।
ये प्यारी छंदस ‘पुण्डरीक’ न्यारी।।

“माभाराया” = मगण भगण रगण यगण।

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प्रदोष छंद “कविता ऐसे जन्मी है”

प्रदोष छंद विधान –

यह 13 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है। दो-दो चरण या चारों चरण समतुकांत होते हैं। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

अठकल+त्रिकल+द्विकल =13 मात्रायें

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पुट छंद “रामनवमी”

पुट छंद विधान –

“ननमय” यति राखें, आठ चारा।
‘पुट’ मधुर रचायें, छंद प्यारा।।

“ननमय” = नगण नगण मगण यगण

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चामर छंद “मुरलीधर छवि”

चामर छंद विधान –

“राजराजरा” सजा रचें सुछंद ‘चामरं’।
पक्ष वर्ण छंद गूँज दे समान भ्रामरं।।

“राजराजरा” = रगण जगण रगण जगण रगण

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पुनीत छंद

पुनीत छंद विधान –

यह 15 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है। दो दो चरण या चारों चरण समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
चौक्कल+छक्कल +SS1(गुरु गुरु लघु) = 15 मात्रायें।

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चौपाई छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

चौपाई छंद विधान

चौपाई छंद विधान

चौपाई 16 मात्रा का बहुत ही व्यापक छंद है। यह चार चरणों का सम मात्रिक छंद है। चौपाई के दो चरण अर्द्धाली या पद कहलाते हैं। एक चरण में आठ से सोलह वर्ण तक हो सकते हैं, पर मात्राएँ 16 से न्यूनाधिक नहीं हो सकती।

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कज्जल छंद

कज्जल छंद विधान-

यह 14 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है। दो दो चरण या चारों चरण समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल+त्रिकल+गुरु और लघु=14 मात्राएँ।

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बृहत्य छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बृहत्य छंद

बृहत्य छंद विधान –

बृहत्य छंद 9 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छन्द है जिसका वर्ण विन्यास 122*3 है। इस चार चरणों के छंद में 2-2 अथवा चारों चरणों में समतुकांतता रखी जाती है। यह छंद वाचिक स्वरूप में अधिक प्रसिद्ध है

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त्रिलोकी छंद

त्रिलोकी छंद विधान- 

यह प्रति पद 21 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है जो 11,10 मात्राओं के दो यति खण्डों में विभाजित रहता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

अठकल + गुरु और लघु, त्रिकल + द्विकल + द्विकल + लघु और गुरु = 11, 10 = 21 मात्राएँ।

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