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Category: छंद

महाश्रृंगार छंद ‘चुनावी हल्ला’

महाश्रृंगार छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जो 16 16 मात्रा के दो यति खण्ड में विभक्त रहता है। 16 मात्रा के यति खण्ड की मात्रा बाँट ठीक श्रृंगार छंद वाली है, जो 3 – 2 – 8 – 21(ताल) है।

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रथोद्धता छंद “आह्वाहन”

रथोद्धता छंद विधान –
“रानरा लघु गुरौ” ‘रथोद्धता’।
तीन वा चतुस तोड़ के सजा।

“रानरा लघु गुरौ” = 212 111 212 12

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रुचिरा छंद ‘भाभी’

रुचिरा छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।प्रत्येक पद 14,16 मात्राओं के दो यति खंडों में विभाजित रहता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + छक्कल, गुरु + अठकल + छक्कल
2222 222, 2 2222 222(S)

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गजपति छंद “नव उड़ान”

गजपति छंद विधान –

“नभलगा” गण रखो।
‘गजपतिम्’ रस चखो।।

“नभलगा” नगण  भगण लघु गुरु
( 111   211  1 2)

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कर्ण छंद ‘नववर्ष उल्लास’

कर्ण छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। चार पदों के इस छंद में चारों या दो दो पद समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 2222 21, 12221 122 22 (SS)

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विधाता छंद “नव वर्ष”

विधाता छंद 28 मात्रा प्रति पद का सम पद मात्रिक छंद है जो 14 – 14 मात्रा के दो यति खंडों में विभक्त रहता है।

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शोकहर छंद ‘बेटी’

शोकहर छंद 30 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2222, 2222, 2222, 222 (S)
8+8+8+6 = 30 मात्रा।

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शालिनी छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

शालिनी छंद “राम स्तवन”

शालिनी छंद विधान –
राचें बैठा, सूत्र “मातातगागा”।
गावें प्यारी, ‘शालिनी’ छंद रागा।।

“मातातगागा”= मगण, तगण, तगण, गुरु, गुरु
(222 221 221 22)

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कमंद छंद “परिवार”

कमंद छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है।इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल + छक्कल + लघु,  यगण(122) +अठकल + गुरु गुरु (SS)

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किशोर छंद

किशोर छंद विधान –

किशोर छंद मूल रूप से एक मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक पद मे 22 मात्राएँ होती हैं तथा यति 16 व 6 मात्राओं पर होती है।

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हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम”

हरिणी छंद विधान –

मधुर ‘हरिणी’, राचें बैठा, “नसामरसालगे”।
प्रथम यति है, छै वर्णों पे, चतुष् फिर सप्त पे।

“नसामरसालगे” = नगण, सगण, मगण, रगण, सगण, लघु और गुरु।
111 112, 222 2,12 112 12

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तंत्री छंद ‘दुल्हन’

तंत्री छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है। प्रत्येक पद क्रमशः 8, 8, 6, 10 मात्राओं के चार यति खंडों में विभाजित रहता है।

2222, 2222, 222, 2 2222

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कामदा छंद “देश की हालत”

कामदा छंद / पंक्तिका छंद विधान –

“रायजाग” ये वर्ण राखते।
छंद ‘कामदा’ धीर चाखते।।

“रायजाग” = रगण यगण जगण गुरु (212 122 121 2)

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कलाधर छंद “योग साधना”

कलाधर छंद विधान –

पाँच बार “राज” पे “गुरो” ‘कलाधरं’ सुछंद।
षोडशं व पक्ष पे विराम आप राखिए।।
ये घनाक्षरी समान छंद है प्रवाहमान।
राचिये इसे सभी पियूष-धार चाखिये।।

पाँच बार “राज” पे “गुरो” = (रगण+जगण)*5 + गुरु। (212  121)*5+2
यानी गुरु लघु की 15 आवृत्ति के बाद गुरु यानी
21×15 + 2 तथा 16 और पक्ष=15 पर यति।

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खरारी छंद “जलियाँवाला बाग”

खरारी छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 8, 6, 8, 10 मात्राओं पर यति आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2 222, 222, 2222, 2 2222

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कनक मंजरी छंद “गोपी विरह”

कनक मंजरी छंद विधान:-

प्रथम रखें लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ रख लें।
सु’कनक मंजरि’ छंद रचें यति तेरह वर्ण तथा दश पे।।

लघु चार तबै षट “भा” गण संग व ‘गा’ = 4लघु+6भगण(211)+1गुरु]=23 वर्ण

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पद्मावती छंद “दीपोत्सव”

पद्मावती छंद 32 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जिसमें क्रमशः 10, 8, 14 मात्रा पर यति आवश्यक है।
प्रथम दो अंतर्यतियों में समतुकांतता आवश्यक है। इसका मात्रा विन्यास –
2 2222, 2222, 2222 22 S = 10+ 8+ 14 = 32 मात्रा।

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वागीश्वरी सवैया “दया”

वागीश्वरी सवैया विधान – यह 23 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। यह सवैया यगण (122) पर आश्रित है, जिसकी 7 आवृत्ति तथा चरण के अंतमें लघु गुरु वर्ण जुड़ने से होती है।
(122 122 122 122 122 122 122 12)

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