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Category: छंद

दिगपाल छंद ‘पिता’

दिगपाल छंद जो कि मृदुगति छंद के नाम से भी जाना जाता है, 24 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है।
यह 12 और 12 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2212 122, 2212 122

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सोरठा छंद ‘राम महिमा’

सोरठा छंद और दोहा छंद के विधान में कोई अंतर नहीं है केवल चरण पलट जाते हैं। दोहा के सम चरण सोरठा में विषम बन जाते हैं और दोहा के विषम चरण सोरठा के सम। तुकांतता भी वही रहती है। यानी सोरठा में विषम चरण में तुकांतता निभाई जाती है जबकि पंक्ति के अंत के सम चरण अतुकांत रहते हैं।

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पादाकुलक छंद ‘राम महिमा’

पादाकुलक छंद 16 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। इन 16 मात्राओं की मात्रा बाँट:- चार चौकल हैं।
पादाकुलक छंद के विभिन्न भेदों में मत्त समक छंद, विश्लोक छंद, चित्रा छंद, वानवासिका छंद इत्यादि सम्मिलित हैं।

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मदनाग छंद ‘साइकिल’

मदनाग छंद 25 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जो 17-8 मात्राओं के दो यति खण्ड में विभक्त रहता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

1222 1222 12, 222S

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सुगति छंद “शांति”

सुगति छंद जो कि शुभगति छंद के नाम से भी जाना जाता है, 7 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत गुरु वर्ण (S) से होना आवश्यक है।

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सुगीतिका छंद, ‘मेरे लाल’

सुगीतिका छंद विधान-

सुगीतिका छंद 25 मात्राओं का समपद मात्रिक छंद है जो 15-10 मात्राओं के दो यति खण्ड में विभक्त रहता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-

1 2122*2, 2122 21

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एकावली छंद “मनमीत”

एकावली छंद विधान – एकावली छंद 10 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है जिसमें पाँच पाँच मात्राओं के दो यति खण्ड रहते हैं। इन 10 मात्राओं का विन्यास दो पंचकल (5, 5) हैं।

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तोटक छंद ‘उठ भोर हुई’

तोटक छंद ‘उठ भोर हुई’

उठ भोर हुई बगिया महके।
चिड़िया मदमस्त हुई चहके।।
झट आलस त्याग करो अपना।
तब ही सच हो सबका सपना।।

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नील छंद “विरहणी”

नील छंद / अश्वगति छंद विधान –

“भा” गण पांच रखें इक साथ व “गा” तब दें।
‘नील’ सुछंदजु षोडस आखर की रच लें।।

“भा” गण पांच रखें इक साथ व “गा”= 5 भगण+गुरु

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कामरूप /वैताल छंद ‘माँ की रसोई’

कामरूप छंद
माँ की रसोई, श्रेष्ठ होई, है न इसका तोड़।
जो भी पकाया, खूब खाया, रोज लगती होड़।।
हँसकर बनाती, वो खिलाती, प्रेम से खुश होय।
था स्वाद मीठा, जो पराँठा, माँ खिलाती पोय।।

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धार छंद “आज की दशा”

धार छंद विधान
“माला” वार।
पाओ ‘धार’।।

“माला” = मगण लघु
222 1 = 4 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद।

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गगनांगना छंद ‘आखा तीज’

गगनांगना छंद 25 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है जो 16 और 9 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2222 2222, 22 S1S

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कामरूप छंद “आज की नारी”

कामरूप छंद / वैताल छंद 26 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है, जिसका पद 9 मात्रा, 7 मात्रा और 10 मात्रा के तीन यति खण्डों में विभक्त रहता है।
22122, 2122, 2122 21 (अत्युत्तम)।

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सरसी छंद ‘हे नाथ’

“सरसी छंद”

करो कृपा हे नाथ विनय मैं, करती बारम्बार।
श्रद्धा तुझमें बढ़ती जाये, तुम जीवन सुखसार।।

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रुचिरा छंद “भक्ति मुक्तक”

रुचिरा छंद “भक्ति मुक्तक”

राम रसायन के दाता, हनुमान सभी पर कृपा करें।
त्राहि-त्राहि के बोल सुनें, प्रभु अपना करतल वरद धरें।
कल्पनेश अति दीन-दुखी, नित यशस् आप का है गाता।
तनिक अनुग्रह ही करके, हरि इसके चित्त विकार हरें।1।

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सरसी छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

सरसी छंद “राजनाथजी”

सरसी छंद जो कि कबीर छंद के नाम से भी जाना जाता है, चार पदों का सम-पद मात्रिक छंद है। इस में प्रति पद 27 मात्रा होती है। यति 16 और 11 मात्रा पर है अर्थात प्रथम चरण 16 मात्रा का तथा द्वितीय चरण 11 मात्रा का होता है। यह छंद सुमंदर छंद के नाम से भी जाना जाता है।

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दोधक छंद “आत्म मंथन”

दोधक छंद / बंधु छंद विधान –
“भाभभगाग” इकादश वर्णा।
देवत ‘दोधक’ छंद सुपर्णा।।
“भाभभगाग” = भगण भगण भगण गुरु गुरु
211 211 211 22 = 11 वर्ण की वर्णिक छंद।

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गीता छंद, “गीता पढ़ने के लाभ”

गीता छंद 26 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है जो 14 और 12 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है।
इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2212 2212, 2212 221

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तोटक छंद “विरह”

तोटक छंद विधान –
जब द्वादश वर्ण “ससासस” हो।
तब ‘तोटक’ पावन छंदस हो।।

“ससासस” = चार सगण
112 112 112 112 = 12 वर्ण

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