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Category: छंद

पंचचामर छंद “देहाभिमान”

पंचचामर छंद जो कि नाराच छंद के नाम से भी जाना जाता है, १६ वर्ण प्रति पद का वर्णिक छंद है।

लघु गुरु x 8 = 16 वर्ण, यति 8+8 वर्ण पर।

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चंद्रमणि छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

चंद्रमणि छंद “गिल्ली डंडा”

चंद्रमणि छंद 13 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। इन 13 मात्राओं की मात्रा बाँट ठीक दोहा छंद के विषम चरण वाली है जो 8 2 1 2 = 13 मात्रा है।

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निश्चल छंद, ‘ऋतु शीत’

निश्चल छंद 23 मात्रा प्रति पद की सम मात्रिक छंद है।
यह 16 और 7 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहती है। दो दो या चारों पद समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2222 2222, 22S1

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दोहा छंद “वयन सगाई अलंकार”

चारणी साहित्य मे दोहा छंद के कई विशिष्ट अलंकार हैं, उन्ही में सें एक वयन सगाई अलंकार (वैण सगाई अलंकार) है। दोहा छंद के हर चरण का प्रारंभिक व अंतिम शब्द एक ही वर्ण से प्रारंभ हो तो यह अलंकार सिद्ध होता है।

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लावणी छंद “हिन्दी”

लावणी छंद सम-पद मात्रिक छंद है। इस छंद में चार पद होते हैं, जिनमें प्रति पद 30 मात्राएँ होती हैं।

प्रत्येक पद दो चरण में बंटा हुआ रहता है जिनकी यति 16-14 पर निर्धारित होती है।

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उल्लाला छंद “किसान”

उल्लाला छंद 26 मात्रिक छंद है जिसके चरण 13-13 मात्राओं के यति खण्डों में विभाजित रहते हैं। चरण की मात्रा बाँट: अठकल + द्विकल + लघु + द्विकल है।

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भुजंगी छंद
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

भुजंगी छंद ‘गीत’

भुजंगी छंद 11 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद है जिसका वर्ण विन्यास 122*3 + 12 है।

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गोपाल छंद “वीर सावरकर”

गोपाल छंद जो भुजंगिनी छंद के नाम से भी जाना जाता है, 15 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। 15 मात्राओं की मात्रा बाँट:- अठकल + त्रिकल + 1S1 (जगण) है।

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किरीट सवैया ‘चेतावनी’

किरीट सवैया 24 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। अन्य सभी सवैया छंदों की तरह इसकी रचना भी चार चरण में होती है और सभी चारों चरण एक ही तुकांतता के होने आवश्यक हैं।

यह सवैया भगण (211) पर आश्रित है, जिसकी 8 आवृत्ति प्रति चरण में रहती है।

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शोभन छंद ‘मंगलास्तुति’

शोभन छंद जो कि सिंहिका छंद के नाम से भी जाना जाता है, 24 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है।
यह 14 और 10 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
5 2 5 2, 212 1121

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धुनी छंद “फाग रंग”

धुनी छंद विधान –

“भाजग” रखें गुनी।
‘छंद’ रचते ‘धुनी’।।

“भाजग” = भगण जगण गुरु।
211 121 2 = 7 वर्ण प्रति चरण का वर्णिक छंद।

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सुमित्र छंद “मेरा भाई”

सुमित्र छंद 24 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है।
यह 10 और 14 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। इसका चरणादि एवं चरणान्त जगण (121) से होना अनिवार्य है। इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
121 222, 2222 (अठकल) 2121

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जलहरण घनाक्षरी “सिद्धु”

जलहरण घनाक्षरी – चार पदों के इस छंद में प्रत्येक पद में कुल वर्ण संख्या 32 रहती है। 32 वर्ण लंबे पद में 16, 16 पर यति रखना अनिवार्य है। जलहरण घनाक्षरी का पदांत सदैव लघु लघु वर्ण (11) से होना आवश्यक है।

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सारस छंद ‘जीवन रहस्य’

सारस छंद 24 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है।
यह 12 और 12 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। चरणादि गुरु वर्ण तथा विषमकल होना अनिवार्य है। चरणान्त सगण (112) से होता है।

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गंग छंद ‘गंग धार’

गंग छंद 9 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है जिसका अंत गुरु गुरु (SS) से होना आवश्यक है।

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तरलनयन छंद ‘नटवर छवि’

तरलनयन छंद विधान –

चतुष नगण, षट षट यति।
‘तरलनयन’, धरतत गति।।

तरलनयन छंद चार नगण से युक्त 12 वर्ण का वर्णिक छंद है। इसमें सब लघु वर्ण रहने चाहिए। यति छह छह वर्ण पर है।

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उज्ज्वला छंद ‘हल्दीघाटी’

उज्ज्वला छंद 15 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है। यह तैथिक जाति का छंद है। इन 15 मात्राओं की मात्रा बाँट:- द्विकल + अठकल + S1S (रगण) है।

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अरिल्ल छंद ‘सावन’

अरिल्ल छंद 16 मात्रा प्रति चरण का सम मात्रिक छंद है। प्रति चरण चार चौकल के अतिरिक्त अरिल्ल छंद में चरणांत की बाध्यता है। यह चरणांत दो लघु (11) या यगण (1SS) का हो सकता है।
डिल्ला छंद विधान – डिल्ला छंद संस्कारी जाति का 16 मात्रिक छंद है। इसमें चार चौकल के अतिरिक्त चरणांत भगण (S11) से होना चाहिए।

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सारस छंद, ‘संकल्प’

सारस छंद 24 मात्रा प्रति पद का सम मात्रिक छंद है।
यह 12 और 12 मात्रा के दो यति खंड में विभक्त रहता है। चरणादि गुरु वर्ण तथा विषमकल होना अनिवार्य है। चरणान्त सगण (112) से होता है।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
2112 2112, 2112 2112

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मकरन्द छंद ‘कन्हैया वंदना’

मकरन्द छंद विधान –

“नयनयनाना, ननगग” पाना,
यति षट षट अठ, अरु षट वर्णा।
मधु ‘मकरन्दा’, ललित सुछंदा,
रचत सकल कवि, यह मृदु कर्णा।।

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